सुनि महीप तापस बस भयऊ
सुनि महीप तापस बस भयऊ
चौपाई ४, दोहा १६३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनि महीप तापस बस भयऊ। आपन नाम कहन तब लयऊ॥ कह तापस नृप जानउँ तोही। कीन्हेहु कपट लाग भल मोही॥ ४ ॥
अर्थ
राजा सुनकर उस तपस्वी के वश में हो गया और तब वह उसे अपना नाम बताने लगा। तपस्वी ने कहा—राजन्! मैं तुमको जानता हूँ। तुमने कपट किया, वह मुझे अच्छा लगा।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १६३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।
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प्रतापभानु की कथा