सुनु महीस असि नीति जहँ तहँ

सोरठा १६३ · बालकाण्ड

सोरठा पाठ

सुनु महीस असि नीति जहँ तहँ नाम न कहहिं नृप। मोहि तोहि पर अति प्रीति सोइ चतुरता बिचारि तव॥ १६३ ॥

अर्थ

हे राजन्! सुनो, ऐसी नीति है कि राजालोग जहाँ-तहाँ अपना नाम नहीं कहते। तुम्हारी वही चतुराई समझकर तुम पर मेरा बड़ा प्रेम हो गया है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “प्रतापभानु की कथा” प्रकरण का सोरठा १६३ है। इस प्रकरण में राजा प्रतापभानु के छल द्वारा विपथित होने और ब्राह्मण-शाप से उनके विनाश का वर्णन है।

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प्रतापभानु की कथा