सुनि बिधि बिनय समुझि प्रभु बानी
सुनि बिधि बिनय समुझि प्रभु बानी
चौपाई ३, दोहा ८९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सुनि बिधि बिनय समुझि प्रभु बानी। ऐसेइ होउ कहा सुखु मानी॥ तब देवन्ह दुंदुभीं बजाईं। बरषि सुमन जय जय सुर साईं॥ ३ ॥
अर्थ
ब्रह्माजीकी प्रार्थना सुनकर और प्रभु श्रीरामचन्द्रजीके वचनोंको याद करके शिवजीने प्रसन्नतापूर्वक कहा--'ऐसा ही हो।' तब देवताओंने नगाड़े बजाये और फूलोंकी वर्षा करके “जय हो! देवताओंके स्वामीकी जय हो!” ऐसा कहने लगे।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “देवताओं की प्रार्थना, सप्तर्षि पार्वती के पास” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ८९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में देवताओं की शिव से विवाह-प्रार्थना और सप्तर्षियों के पार्वती के पास जाने का वर्णन है।
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देवताओं की प्रार्थना, सप्तर्षि पार्वती के पास