अवसरु जानि सप्तरिषि आए
अवसरु जानि सप्तरिषि आए
चौपाई ४, दोहा ८९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
अवसरु जानि सप्तरिषि आए। तुरतहिं बिधि गिरिभवन पठाए॥ प्रथम गए जहँ रहीं भवानी। बोले मधुर बचन छल सानी॥ ४ ॥
अर्थ
उचित अवसर जानकर सप्तर्षि आये और ब्रह्माजीने तुरंत ही उन्हें हिमाचलके घर भेज दिया। वे पहले वहाँ गये जहाँ पार्वतीजी थीं और उनसे छलसे भरे मीठे (विनोदयुक्त, आनन्द पहुँचानेवाले) वचन बोले--।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “देवताओं की प्रार्थना, सप्तर्षि पार्वती के पास” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ८९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में देवताओं की शिव से विवाह-प्रार्थना और सप्तर्षियों के पार्वती के पास जाने का वर्णन है।
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देवताओं की प्रार्थना, सप्तर्षि पार्वती के पास