सुंदर श्रवन सुचारु कपोला

चौपाई ५, दोहा १९९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

सुंदर श्रवन सुचारु कपोला। अति प्रिय मधुर तोतरे बोला॥ चिक्कन कच कुंचित गभुआरे। बहु प्रकार रचि मातु सँवारे॥ ५ ॥

अर्थ

सुन्दर कान और सुचारु गाल हैं, मधुर तोतली बोली बहुत ही प्यारी लगती है। चिकने, घुँघराले बाल हैं, जिन्हें माता ने बहुत प्रकार से रचकर सँवारा है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा १९९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के मंगलमय प्राकट्य और आनंदमयी बाललीलाओं का वर्णन है।

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श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला