पीत झगुलिआ तनु पहिराई

चौपाई ६, दोहा १९९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

पीत झगुलिआ तनु पहिराई। जानु पानि बिचरनि मोहि भाई॥ रूप सकहिं नहिं कहि श्रुति सेषा। सो जानइ सपनेहुँ जेहिं देखा॥ ६ ॥

अर्थ

शरीर पर पीली झगुली पहनाई हुई है। उनका घुटनों और हाथों के बल चलना मुझे बहुत भाई। उनके रूप का वर्णन वेद और शेषजी भी नहीं कर सकते। उसे वही जानता है जिसने सपने में भी देखा हो।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला” प्रकरण का चौपाई ६, दोहा १९९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के मंगलमय प्राकट्य और आनंदमयी बाललीलाओं का वर्णन है।

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श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला