कंबु कंठ अति चिबुक सुहाई
कंबु कंठ अति चिबुक सुहाई
चौपाई ४, दोहा १९९ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
कंबु कंठ अति चिबुक सुहाई। आनन अमित मदन छबि छाई॥ दुइ दुइ दसन अधर अरुनारे। नासा तिलक को बरनै पारे॥ ४ ॥
अर्थ
कण्ठ शंख के समान है और ठोड़ी बहुत ही सुहावनी है। मुख पर अनन्त कामदेवों की छटा छाई हुई है। दो-दो दाँत हैं, लाल-लाल ओठ हैं। नासिका और तिलक के सौन्दर्य का तो वर्णन ही कौन कर सकता है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १९९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के मंगलमय प्राकट्य और आनंदमयी बाललीलाओं का वर्णन है।
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श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला