सुंदर सदनु सुखद सब काला
सुंदर सदनु सुखद सब काला
चौपाई ४, दोहा २१७ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सुंदर सदनु सुखद सब काला। तहाँ बासु लै दीन्ह भुआला॥ करि पूजा सब बिधि सेवकाई। गयउ राउ गृह बिदा कराई॥ ४ ॥
अर्थ
एक सुन्दर महल जो सब समय सुखदायक था, वहाँ राजाने उन्हें ठहराया। तदनन्तर सब प्रकार से पूजा और सेवा करके राजा विदा माँगकर अपने घर गये।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “राम-लक्ष्मण को देख जनक मुग्ध” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २१७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण के मनोहर रूप को देख जनकजी की प्रेममुग्धता और ब्रह्मसुख-विस्मृति का वर्णन है।
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राम-लक्ष्मण को देख जनक मुग्ध