रिषय संग रघुबंस मनि करि भोजनु

दोहा २१७ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

रिषय संग रघुबंस मनि करि भोजनु बिश्रामु। बैठे प्रभु भ्राता सहित दिवसु रहा भरि जामु॥ २१७ ॥

अर्थ

रघुकुल के शिरोमणि प्रभु श्रीरामचन्द्रजी ऋषियों के साथ भोजन और विश्राम करके भाई लक्ष्मण समेत बैठे। उस समय पहर भर दिन रह गया था।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “राम-लक्ष्मण को देख जनक मुग्ध” प्रकरण का दोहा २१७ है। इस प्रकरण में श्रीराम-लक्ष्मण के मनोहर रूप को देख जनकजी की प्रेममुग्धता और ब्रह्मसुख-विस्मृति का वर्णन है।

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राम-लक्ष्मण को देख जनक मुग्ध