सुंदर भृकुटि मनोहर नासा
सुंदर भृकुटि मनोहर नासा
चौपाई ५, दोहा ३२७ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सुंदर भृकुटि मनोहर नासा। भाल तिलकु रुचिरता निवासा॥ सोहत मौरु मनोहर माथे। मंगलमय मुकुता मनि गाथे॥ ५ ॥
अर्थ
सुन्दर भौंहें और मनोहर नासिका है। ललाट पर तिलक तो सुन्दरता का घर ही है। जिसमें मंगलमय मोती और मणि गुँथे हुए हैं, ऐसा मनोहर मौर माथे पर सोह रहा है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ३२७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
श्रीसीता-राम विवाह