पिअर उपरना काखासोती

चौपाई ४, दोहा ३२७ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

पिअर उपरना काखासोती। दुहुँ आँचरन्हि लगे मनि मोती॥ नयन कमल कल कुंडल काना। बदनु सकल सौंदर्ज निधाना॥ ४ ॥

अर्थ

पीला दुपट्टा काँखासोती (जनेऊ की तरह) शोभित है, जिसके दोनों आँचलों से मणि और मोती लगे हैं। कमल के समान सुन्दर नेत्र हैं, कानों में सुन्दर कुण्डल हैं और मुख तो सारी सुन्दरता का खजाना ही है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३२७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।

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श्रीसीता-राम विवाह