सुनत बचन बिहसे रिषय गिरिसंभव तव

दोहा ७८ · बालकाण्ड

दोहा पाठ

सुनत बचन बिहसे रिषय गिरिसंभव तव देह। नारद कर उपदेसु सुनि कहहु बसेउ किसु गेह॥ ७८ ॥

अर्थ

पार्वतीजी की बात सुनते ही ऋषि लोग हँस पड़े और बोले-- तुम्हारा शरीर पर्वत से ही तो उत्पन्न हुआ है! भला, कहो तो नारद के उपदेश सुनकर आज तक किसका घर बसा है?

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “सप्तर्षियों की परीक्षा में पार्वती” प्रकरण का दोहा ७८ है। इस प्रकरण में सप्तर्षियों द्वारा पार्वतीजी की निष्ठा-परीक्षा और उनकी अडिग भक्ति एवं महिमा का वर्णन है।

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सप्तर्षियों की परीक्षा में पार्वती