दच्छसुतन्ह उपदेसेन्हि जाई

चौपाई १, दोहा ७९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

दच्छसुतन्ह उपदेसेन्हि जाई। तिन्ह फिरि भवनु न देखा आई॥ चित्रकेतु कर घरु उन घाला। कनककसिपु कर पुनि अस हाला॥ १ ॥

अर्थ

उन्होंने जाकर दक्ष के पुत्रों को उपदेश दिया था, जिससे उन्होंने फिर लौटकर घर का मुँह भी नहीं देखा। चित्रकेतु के घर को नारद ने ही चौपट किया। फिर यही हाल हिरण्यकशिपु का हुआ।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “सप्तर्षियों की परीक्षा में पार्वती” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ७९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में सप्तर्षियों द्वारा पार्वतीजी की निष्ठा-परीक्षा और उनकी अडिग भक्ति एवं महिमा का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
सप्तर्षियों की परीक्षा में पार्वती