सुकृती तुम्ह समान जग माहीं
सुकृती तुम्ह समान जग माहीं
चौपाई ३, दोहा २९४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सुकृती तुम्ह समान जग माहीं। भयउ न है कोउ होनेउ नाहीं॥ तुम्ह ते अधिक पुन्य बड़ काकें। राजन राम सरिस सुत जाकें॥ ३ ॥
अर्थ
तुम्हारे समान पुण्यात्मा जगत् में न कोई हुआ, न है और न होने का ही है। हे राजन्! तुमसे अधिक पुण्य और किसका होगा, जिसके राम-सरीखे पुत्र हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “जनक का दूत, बारात का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २९४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जनक के दूत के संदेश पर दशरथजी की बारात का जनकपुर के लिए हर्षपूर्ण प्रस्थान का वर्णन है।
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जनक का दूत, बारात का प्रस्थान