बीर बिनीत धरम ब्रत धारी

चौपाई ४, दोहा २९४ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

बीर बिनीत धरम ब्रत धारी। गुन सागर बर बालक चारी॥ तुम्ह कहुँ सर्ब काल कल्याना। सजहु बरात बजाइ निसाना॥ ४ ॥

अर्थ

और जिसके चारों बालक वीर, विनम्र, धर्म का व्रत धारण करनेवाले और गुणों के सुन्दर समुद्र हैं। तुम्हारे लिये सभी कालों में कल्याण है। अतएव डंका बजवाकर बारात सजाओ।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “जनक का दूत, बारात का प्रस्थान” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २९४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में जनक के दूत के संदेश पर दशरथजी की बारात का जनकपुर के लिए हर्षपूर्ण प्रस्थान का वर्णन है।

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जनक का दूत, बारात का प्रस्थान