सुकृत पुंज मंजुल अलि माला

चौपाई ४, दोहा ३७ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

सुकृत पुंज मंजुल अलि माला। ग्यान बिराग बिचार मराला॥ धुनि अवरेब कबित गुन जाती। मीन मनोहर ते बहुभाँती॥ ४ ॥

अर्थ

सत्कर्मों (पुण्यों) के पुंज भौंरों की सुन्दर पंक्तियाँ हैं, ज्ञान, वैराग्य और विचार हंस हैं। कविताकी ध्वनि, अवरेब, गुण और जाति ही अनेकों प्रकारकी मनोहर मछलियाँ हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा ३७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।

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मानस का रूप और माहात्म्य