छंद सोरठा सुंदर दोहा

चौपाई ३, दोहा ३७ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

छंद सोरठा सुंदर दोहा। सोइ बहुरंग कमल कुल सोहा॥ अरथ अनूप सुभाव सुभासा। सोइ पराग मकरंद सुबासा॥ ३ ॥

अर्थ

जो सुन्दर छन्द, सोरठे और दोहे हैं, वही इसमें बहुरंगे कमलोंके समूह सुशोभित हैं। अनुपम अर्थ, ऊँचे भाव और सुन्दर भाषा ही पराग (पुष्परज), मकरन्द (पुष्परस) और सुगन्ध हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।

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मानस का रूप और माहात्म्य