अरथ धरम कामादिक चारी

चौपाई ५, दोहा ३७ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

अरथ धरम कामादिक चारी। कहब ग्यान बिग्यान बिचारी॥ नव रस जप तप जोग बिरागा। ते सब जलचर चारु तड़ागा॥ ५ ॥

अर्थ

अर्थ, धर्म, कामादिक चारों, ज्ञान-विज्ञानका विचारके कहना, काव्यके नौ रस, जप, तप, योग और वैराग्यके प्रसंग--ये सब इस सरोवरके सुन्दर जलचर जीव हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई ५, दोहा ३७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।

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मानस का रूप और माहात्म्य