सुख संदोह मोहपर ग्यान गिरा गोतीत
सुख संदोह मोहपर ग्यान गिरा गोतीत
दोहा १९९ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
सुख संदोह मोहपर ग्यान गिरा गोतीत। दंपति परम प्रेम बस कर सिसुचरित पुनीत॥ १९९ ॥
अर्थ
जो सुख के पुंज, मोह से परे तथा ज्ञान और वाणी से अतीत हैं, वे दंपति के परम प्रेम बस होकर पवित्र बालचरित करते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला” प्रकरण का दोहा १९९ है। इस प्रकरण में अयोध्या में श्रीराम के मंगलमय प्राकट्य और आनंदमयी बाललीलाओं का वर्णन है।
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श्रीराम का प्राकट्य और बाललीला