सुक सारिका जानकी ज्याए
सुक सारिका जानकी ज्याए
चौपाई १, दोहा ३३८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सुक सारिका जानकी ज्याए। कनक पिंजरन्हि राखि पढ़ाए॥ ब्याकुल कहहिं कहाँ बैदेही। सुनि धीरजु परिहरइ न केही॥ १ ॥
अर्थ
जानकी ने जिन तोता और मैना को पाल-पोसकर बड़ा किया था और सोने के पिंजरों में रखकर पढ़ाया था, वे व्याकुल होकर कह रहे हैं-वैदेही कहाँ हैं। उनके ऐसे वचनों को सुनकर धैर्य किसको नहीं त्याग देगा (अर्थात् सबका धैर्य जाता रहा)।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३३८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।
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श्रीसीता-राम विवाह