भए बिकल खग मृग एहि भाँती

चौपाई २, दोहा ३३८ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

भए बिकल खग मृग एहि भाँती। मनुज दसा कैसें कहि जाती॥ बंधु समेत जनकु तब आए प्रेम उमगि लोचन जल छाए॥ २ ॥

अर्थ

जब पक्षी और पशु तक इस तरह विकल हो गये, तब मनुष्यों की दशा कैसे कही जा सकती है ! तब भाई समेत जनकजी वहाँ आये। प्रेम से उमड़कर उनके नेत्रों में [प्रेमाश्रुओं का] जल भर आया।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “श्रीसीता-राम विवाह” प्रकरण का चौपाई २, दोहा ३३८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीता-राम सहित चारों राजकुमारों के विवाह और जनकपुर के मंगलमय उत्सव का वर्णन है।

पूरा प्रकरण पढ़ें

पूरा प्रकरण पढ़ें
श्रीसीता-राम विवाह