सुक सनकादि भगत मुनि नारद
सुक सनकादि भगत मुनि नारद
चौपाई ३, दोहा १८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सुक सनकादि भगत मुनि नारद। जे मुनिबर बिग्यान बिसारद॥ प्रनवउँ सबहि धरनि धरि सीसा। करहु कृपा जन जानि मुनीसा॥ ३ ॥
अर्थ
शुकदेवजी, सनकादि, नारदमुनि आदि जितने भक्त और परम ज्ञानी श्रेष्ठ मुनि हैं, मैं धरती पर सिर टेककर उन सबको प्रणाम करता हूँ; हे मुनीसा! आप सब मुझे अपना जन जानकर कृपा कीजिये।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “सीताराम और परिकर वन्दना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीताराम, अयोध्यापुरी, सरयू, दशरथ, कौसल्या, लक्ष्मण और भक्त मुनियों की श्रद्धापूर्ण वन्दना का वर्णन है।
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सीताराम और परिकर वन्दना