रघुपति चरन उपासक जेते
रघुपति चरन उपासक जेते
चौपाई २, दोहा १८ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
रघुपति चरन उपासक जेते। खग मृग सुर नर असुर समेते॥ बंदउँ पद सरोज सब केरे। जे बिनु काम राम के चेरे॥ २ ॥
अर्थ
पशु, पक्षी, देवता, मनुष्य, असुर समेत जितने श्रीरामजी के चरणों के उपासक हैं, मैं उन सबके चरणकमलों की वन्दना करता हूँ, जो श्रीरामजी के निष्काम सेवक हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “सीताराम और परिकर वन्दना” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १८ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीताराम, अयोध्यापुरी, सरयू, दशरथ, कौसल्या, लक्ष्मण और भक्त मुनियों की श्रद्धापूर्ण वन्दना का वर्णन है।
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सीताराम और परिकर वन्दना