सुधा समुद्र समीप बिहाई
सुधा समुद्र समीप बिहाई
चौपाई ३, दोहा २४६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सुधा समुद्र समीप बिहाई। मृगजलु निरखि मरहु कत धाई॥ करहु जाइ जा कहुँ जोइ भावा। हम तौ आजु जनम फलु पावा॥ ३ ॥
अर्थ
समीप आये हुए (भगवद्-दर्शनरूप) अमृत के समुद्र को छोड़कर तुम [जगज्जननी जानकी को पत्नीरूप में पाने की दुराशारूप मिथ्या] मृगजल को देखकर दौड़कर क्यों मरते हो? फिर [भाई! ] जिसको जो अच्छा लगे वही जाकर करो। हमने तो [श्रीरामचन्द्रजी के दर्शन करके] आज जन्म लेने का फल पा लिया (जीवन और जन्म को सफल कर लिया)।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “विश्वामित्र का यज्ञशाला में प्रवेश” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा २४६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विश्वामित्र के साथ यज्ञशाला में श्रीराम-लक्ष्मण के प्रवेश और सभा के विविध भावमय दर्शन का वर्णन है।
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विश्वामित्र का यज्ञशाला में प्रवेश