अस कहि भले भूप अनुरागे

चौपाई ४, दोहा २४६ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

अस कहि भले भूप अनुरागे। रूप अनूप बिलोकन लागे॥ देखहिं सुर नभ चढ़े बिमाना। बरषहिं सुमन करहिं कल गाना॥ ४ ॥

अर्थ

ऐसा कहकर अच्छे राजा प्रेममग्न होकर श्रीरामजी का अनुपम रूप देखने लगे। [मनुष्यों की तो बात ही क्या] देवता लोग भी आकाश से विमानों पर चढ़े हुए दर्शन कर रहे हैं और सुन्दर गान करते हुए फूल बरसा रहे हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “विश्वामित्र का यज्ञशाला में प्रवेश” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २४६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विश्वामित्र के साथ यज्ञशाला में श्रीराम-लक्ष्मण के प्रवेश और सभा के विविध भावमय दर्शन का वर्णन है।

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विश्वामित्र का यज्ञशाला में प्रवेश