सृंगी रिषिहि बसिष्ठ बोलावा

चौपाई ३, दोहा १८९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

सृंगी रिषिहि बसिष्ठ बोलावा। पुत्रकाम सुभ जग्य करावा॥ भगति सहित मुनि आहुति दीन्हें। प्रगटे अगिनि चरू कर लीन्हें॥ ३ ॥

अर्थ

वसिष्ठजी ने शृंगी ऋषि को बुलवाया और उनसे शुभ पुत्रकामेष्टि यज्ञ कराया। मुनि के भक्तिसहित आहुतियाँ देने पर अग्निदेव हाथ में चरु (हविष्यान्न/खीर) लिये प्रकट हुए।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “दशरथ का पुत्रेष्टि यज्ञ” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १८९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ और रानियों के गर्भवती होने का वर्णन है।

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दशरथ का पुत्रेष्टि यज्ञ