निज दुख सुख सब गुरहि सुनायउ

चौपाई २, दोहा १८९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

निज दुख सुख सब गुरहि सुनायउ। कहि बसिष्ठ बहु बिधि समुझायउ॥ धरहु धीर होइहहिं सुत चारी। त्रिभुवन बिदित भगत भय हारी॥ २ ॥

अर्थ

राजा ने अपना सारा दुःख-सुख गुरु को सुनाया। गुरु वसिष्ठजी ने उन्हें बहुत प्रकार से समझाया [और कहा--] धीरज धरो, तुम्हारे चार पुत्र होंगे, जो तीनों लोकों में प्रसिद्ध और भक्तों का भय हरने वाले होंगे।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “दशरथ का पुत्रेष्टि यज्ञ” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १८९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में राजा दशरथ के पुत्रेष्टि यज्ञ और रानियों के गर्भवती होने का वर्णन है।

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दशरथ का पुत्रेष्टि यज्ञ