मृतक जिआवनि गिरा सुहाई

चौपाई ४, दोहा १४५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

मृतक जिआवनि गिरा सुहाई। श्रवन रंध्र होइ उर जब आई॥ हृष्ट पुष्ट तन भए सुहाए। मानहुँ अबहिं भवन ते आए॥ ४ ॥

अर्थ

मुर्दे को भी जिला देनेवाली यह सुन्दर वाणी कानों के छिद्रों से होकर जब हृदय में आई, तब राजा-रानी के शरीर ऐसे सुन्दर और हृष्ट-पुष्ट हो गये, मानो अभी घर से आये हों।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “मनु-शतरूपा तप एवं वरदान” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १४५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मनु-शतरूपा की कठोर तपस्या और भगवान द्वारा पुत्र रूप में प्रकट होने के वरदान का वर्णन है।

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मनु-शतरूपा तप एवं वरदान