सोइ हरिमाया सब गुन खानी
सोइ हरिमाया सब गुन खानी
चौपाई ३, दोहा १३० के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सोइ हरिमाया सब गुन खानी। सोभा तासु कि जाइ बखानी॥ करइ स्वयंबर सो नृपबाला। आए तहँ अगनित महिपाला॥ ३ ॥
अर्थ
वह सब गुणों की खान भगवान् की माया ही थी। उसकी शोभा का वर्णन कैसे किया जा सकता है। वह राजकुमारी स्वयंवर करना चाहती थी, इससे वहाँ अगणित राजा आये हुए थे।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “नारद का शाप और मोहभंग” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १३० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नारद का स्वयंवर में मोह, शाप और अंततः माया-भंग का वर्णन है।
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नारद का शाप और मोहभंग