सत सुरेस सम बिभव बिलासा

चौपाई २, दोहा १३० के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

सत सुरेस सम बिभव बिलासा। रूप तेज बल नीति निवासा॥ बिस्वमोहनी तासु कुमारी। श्री बिमोह जिसु रूपु निहारी॥ २ ॥

अर्थ

उसका वैभव और विलास सौ इन्द्रों के समान था। वह रूप, तेज, बल और नीति का घर था। उसके विश्वमोहिनी नाम की एक [ऐसी रूपवती] कन्या थी, जिसके रूप को देखकर लक्ष्मीजी भी मोहित हो जायँ।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “नारद का शाप और मोहभंग” प्रकरण का चौपाई २, दोहा १३० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में नारद का स्वयंवर में मोह, शाप और अंततः माया-भंग का वर्णन है।

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नारद का शाप और मोहभंग