सोहत जनु जुग जलज सनाला
सोहत जनु जुग जलज सनाला
चौपाई ४, दोहा २६४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सोहत जनु जुग जलज सनाला। ससिहि सभीत देत जयमाला॥ गावहिं छबि अवलोकि सहेली। सियँ जयमाल राम उर मेली॥ ४ ॥
अर्थ
[उस समय उनके हाथ ऐसे सुशोभित हो रहे हैं] मानो डंडियों सहित दो कमल चन्द्रमा को डराते हुए जयमाला दे रहे हों। इस छबि को देखकर सखियाँ गाने लगीं। तब सीताजी ने श्रीरामजी के गले में जयमाला पहना दी।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “जयमाल पहनाना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा २६४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में धनुषभंग के बाद सीता द्वारा श्रीराम को जयमाल अर्पण और देवताओं की पुष्पवर्षा का वर्णन है।
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जयमाल पहनाना