रघुबर उर जयमाल देखि देव बरिसहिं
रघुबर उर जयमाल देखि देव बरिसहिं
सोरठा २६४ · बालकाण्ड
सोरठा पाठ
रघुबर उर जयमाल देखि देव बरिसहिं सुमन। सकुचे सकल भुआल जनु बिलोकि रबि कुमुदगन॥ २६४ ॥
अर्थ
श्रीरघुनाथजी के हृदय पर जयमाला देखकर देवता फूल बरसाने लगे। समस्त राजागण इस प्रकार सकुचा गये मानो सूर्य को देखकर कुमुदों का समूह सिकुड़ गया हो।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “जयमाल पहनाना” प्रकरण का सोरठा २६४ है। इस प्रकरण में धनुषभंग के बाद सीता द्वारा श्रीराम को जयमाल अर्पण और देवताओं की पुष्पवर्षा का वर्णन है।
पूरा प्रकरण पढ़ें
पूरा प्रकरण पढ़ें
जयमाल पहनाना