सोभा सीवँ सुभग दोउ बीरा
सोभा सीवँ सुभग दोउ बीरा
चौपाई १, दोहा २३३ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सोभा सीवँ सुभग दोउ बीरा। नील पीत जलजाभ सरीरा॥ मोरपंख सिर सोहत नीके। गुच्छ बीच बिच कुसुम कली के॥ १ ॥
अर्थ
दोनों सुन्दर भाई शोभा की सीमा हैं। उनके शरीर की आभा नीले और पीले कमल की-सी है। सिर पर सुन्दर मोरपंख सुशोभित हैं। उनके बीच-बीच में फूलों की कलियों के गुच्छे लगे हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन” प्रकरण का चौपाई १, दोहा २३३ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में पुष्पवाटिका में श्रीसीताराम का परस्पर प्रथम दर्शन और मिलन का वर्णन है।
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पुष्पवाटिका में सीताराम का मिलन