सो उमेस मोहि पर अनुकूला
सो उमेस मोहि पर अनुकूला
चौपाई ४, दोहा १५ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सो उमेस मोहि पर अनुकूला। करिहिं कथा मुद मंगल मूला॥ सुमिरि सिवा सिव पाइ पसाऊ। बरनउँ रामचरित चित चाऊ॥ ४ ॥
अर्थ
वे उमापति शिवजी मुझ पर प्रसन्न होकर [श्रीरामजी की] इस कथा को आनन्द और मंगल की मूल बनायेंगे। इस प्रकार पार्वतीजी और शिवजी दोनों का स्मरण करके और उनका प्रसाद पाकर मैं चाव भरे चित्त से श्रीरामचरित्र का वर्णन करता हूँ।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “वाल्मीकि, शिव-पार्वती आदि वन्दना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वाल्मीकि, वेद, ब्रह्मा, शिव-पार्वती सहित समस्त पूज्य शक्तियों की वन्दना का वर्णन है।
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वाल्मीकि, शिव-पार्वती आदि वन्दना