कलि बिलोकि जग हित हर गिरिजा
कलि बिलोकि जग हित हर गिरिजा
चौपाई ३, दोहा १५ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
कलि बिलोकि जग हित हर गिरिजा। साबर मंत्र जाल जिन्ह सिरिजा॥ अनमिल आखर अरथ न जापू। प्रगट प्रभाउ महेस प्रतापू॥ ३ ॥
अर्थ
जिन शिव-पार्वती ने कलियुग को देखकर, जगत् के हित के लिये, शाबर मन्त्रसमूह की रचना की, जिन मन्त्रों के अक्षर बेमेल हैं, जिनका न कोई ठीक अर्थ होता है और न जप ही होता है, तथापि श्रीशिवजी के प्रताप से जिनका प्रभाव प्रत्यक्ष है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “वाल्मीकि, शिव-पार्वती आदि वन्दना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में वाल्मीकि, वेद, ब्रह्मा, शिव-पार्वती सहित समस्त पूज्य शक्तियों की वन्दना का वर्णन है।
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वाल्मीकि, शिव-पार्वती आदि वन्दना