सो जल सुकृत सालि हित होई
सो जल सुकृत सालि हित होई
चौपाई ४-५, दोहा ३६ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सो जल सुकृत सालि हित होई। राम भगत जन जीवन सोई॥ मेधा महि गत सो जल पावन। सकिलि श्रवन मग चलेउ सुहावन॥ भरेउ सुमानस सुथल थिराना। सुखद सीत रुचि चारु चिराना॥ ४-५ ॥
अर्थ
वह (राम-सुयशरूपी ) जल सत्कर्मरूपी धान के लिये हितकर है और श्रीरामजी के भक्तों का तो जीवन ही है। वह पवित्र जल बुद्धिरूपी पृथ्वी पर गिरा और सिमटकर सुहावने कानरूपी मार्ग से चला और मानस (हृदय) रूपी श्रेष्ठ स्थान में भरकर वहीं स्थिर हो गया। वही पुराना होकर सुन्दर, रुचिकर, शीतल और सुखदायी हो गया।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई ४-५, दोहा ३६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।
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मानस का रूप और माहात्म्य