लीला सगुन जो कहहिं बखानी

चौपाई ३, दोहा ३६ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

लीला सगुन जो कहहिं बखानी। सोइ स्वच्छता करइ मल हानी॥ प्रेम भगति जो बरनि न जाई। सोइ मधुरता सुसीतलताई॥ ३ ॥

अर्थ

श्रीराम की लीला का जो सगुण वर्णन करते हैं, वही राम-सुयशरूपी जल की निर्मलता है, जो मल का नाश करती है; और जिस प्रेम-भक्ति का वर्णन नहीं किया जा सकता, वही इस जल की मधुरता और सुन्दर शीतलता है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा ३६ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।

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मानस का रूप और माहात्म्य