सुठि सुंदर संबाद बर बिरचे बुद्धि
सुठि सुंदर संबाद बर बिरचे बुद्धि
दोहा ३६ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
सुठि सुंदर संबाद बर बिरचे बुद्धि बिचारि। तेइ एहि पावन सुभग सर घाट मनोहर चारि॥ ३६ ॥
अर्थ
इस कथामें बुद्धिसे विचारकर जो चार अत्यन्त सुन्दर और उत्तम संवाद (भुशुण्डि-गरुड़, शिव-पार्वती, याज्ञवल्क्य-भरद्वाज और तुलसीदास और संत) रचे हैं, वही इस पवित्र और सुन्दर सरोवरके चार मनोहर घाट हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का दोहा ३६ है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।
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मानस का रूप और माहात्म्य