सिय बरनिअ तेइ उपमा देई

चौपाई २, दोहा २४७ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

सिय बरनिअ तेइ उपमा देई। कुकबि कहाइ अजसु को लेई॥ जौं पटतरिअ तीय सम सीया। जग असि जुबति कहाँ कमनीया॥ २ ॥

अर्थ

सीताजी के वर्णन में उन्हीं उपमाओं को देकर कौन कुकवि कहलाये और अपयश का भागी बने (अर्थात्‌ सीताजी के लिये उन उपमाओं का प्रयोग करना सुकवि के पद से च्युत होना और अपकीर्ति मोल लेना है, कोई भी सुकवि ऐसी नादानी एवं अनुचित कार्य नहीं करेगा)। यदि किसी स्त्री के साथ सीताजी की तुलना की जाय तो जगत्‌ में ऐसी सुन्दर युवती है ही कहाँ [जिसकी उपमा उन्हें दी जाय]।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “विश्वामित्र का यज्ञशाला में प्रवेश” प्रकरण का चौपाई २, दोहा २४७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में विश्वामित्र के साथ यज्ञशाला में श्रीराम-लक्ष्मण के प्रवेश और सभा के विविध भावमय दर्शन का वर्णन है।

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विश्वामित्र का यज्ञशाला में प्रवेश