सिवँ समुझाए देव सब जनि आचरज
सिवँ समुझाए देव सब जनि आचरज
दोहा ३१४ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
सिवँ समुझाए देव सब जनि आचरज भुलाहु। हृदयँ बिचारहु धीर धरि सिय रघुबीर बिआहु॥ ३१४ ॥
अर्थ
तब शिवजी ने सब देवताओं को समझाया कि तुम लोग आश्चर्य में मत भूलो। हृदय में धीरज धरकर विचार तो करो कि यह श्रीसीताजी का और श्रीरामचन्द्रजी का विवाह है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “बारात का जनकपुर में स्वागत” प्रकरण का दोहा ३१४ है। इस प्रकरण में अयोध्या की बारात का जनकपुर में हर्षपूर्ण स्वागत और मंगल आयोजन का वर्णन है।
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बारात का जनकपुर में स्वागत