जिन्ह कर नामु लेत जग माहीं

चौपाई १, दोहा ३१५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

जिन्ह कर नामु लेत जग माहीं। सकल अमंगल मूल नसाहीं॥ करतल होहिं पदारथ चारी। तेइ सिय रामु कहेउ कामारी॥ १ ॥

अर्थ

जिनका नाम लेते ही जगत में सारे अमंगलों की जड़ नष्ट हो जाती है और चारों पदार्थ (अर्थ, धर्म, काम, मोक्ष) मुट्ठी में आ जाते हैं, ये वही [जगत् के माता-पिता] श्रीसीतारामजी हैं; काम के शत्रु शिवजी ने ऐसा कहा।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “बारात का जनकपुर में स्वागत” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ३१५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में अयोध्या की बारात का जनकपुर में हर्षपूर्ण स्वागत और मंगल आयोजन का वर्णन है।

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बारात का जनकपुर में स्वागत