सिव सम को रघुपति ब्रतधारी
सिव सम को रघुपति ब्रतधारी
चौपाई ४, दोहा १०४ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सिव सम को रघुपति ब्रतधारी। बिनु अघ तजी सती असि नारी॥ पनु करि रघुपति भगति देखाई। को सिव सम रामहि प्रिय भाई॥ ४ ॥
अर्थ
शिवजी के समान रघुनाथजी की भक्ति का व्रत धारण करने वाला कौन है? जिन्होंने बिना ही पाप के सती-जैसी स्त्री को त्याग दिया और प्रतिज्ञा करके श्रीरघुनाथजी की भक्ति को दिखा दिया। हे भाई! श्रीरामचन्द्रजी को शिवजी के समान और कौन प्यारा है?
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिवजी का विवाह” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १०४ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती के दिव्य विवाह और समस्त लोकों में उत्सव का वर्णन है।
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शिवजी का विवाह