प्रथमहिं मैं कहि सिव चरित बूझा
प्रथमहिं मैं कहि सिव चरित बूझा
दोहा १०४ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
प्रथमहिं मैं कहि सिव चरित बूझा मरमु तुम्हार। सुचि सेवक तुम्ह राम के रहित समस्त बिकार॥ १०४ ॥
अर्थ
मैंने पहले ही शिवजी का चरित्र कहकर तुम्हारा भेद समझ लिया। तुम श्रीरामचन्द्रजी के पवित्र सेवक हो और समस्त दोषों से रहित हो।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिवजी का विवाह” प्रकरण का दोहा १०४ है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती के दिव्य विवाह और समस्त लोकों में उत्सव का वर्णन है।
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शिवजी का विवाह