सिद्ध तपोधन जोगिजन सुर किंनर मुनिबृंद
सिद्ध तपोधन जोगिजन सुर किंनर मुनिबृंद
दोहा १०५ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
सिद्ध तपोधन जोगिजन सुर किंनर मुनिबृंद। बसहिं तहाँ सुकृती सकल सेवहिं सिव सुखकंद॥ १०५ ॥
अर्थ
सिद्ध, तपस्वी, योगीगण, देवता, किन्नर और मुनियों के समूह उस पर्वत पर रहते हैं। वे सब बड़े पुण्यात्मा हैं और आनन्दकन्द श्रीमहादेवजी की सेवा करते हैं।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “शिवजी का विवाह” प्रकरण का दोहा १०५ है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती के दिव्य विवाह और समस्त लोकों में उत्सव का वर्णन है।
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शिवजी का विवाह