प्रनवउँ सोइ कृपाल रघुनाथा

चौपाई ४, दोहा १०५ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

प्रनवउँ सोइ कृपाल रघुनाथा। बरनउँ बिसद तासु गुन गाथा॥ परम रम्य गिरिबरु कैलासू। सदा जहाँ सिव उमा निवासू॥ ४ ॥

अर्थ

उन्हीं कृपालु श्रीरघुनाथजी को मैं प्रणाम करता हूँ और उन्हीं के निर्मल गुणों की कथा कहता हूँ। कैलास पर्वतों में श्रेष्ठ और बहुत ही रमणीय है, जहाँ शिव-पार्वतीजी सदा निवास करते हैं।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “शिवजी का विवाह” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १०५ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में शिव-पार्वती के दिव्य विवाह और समस्त लोकों में उत्सव का वर्णन है।

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शिवजी का विवाह