श्रोता त्रिबिध समाज पुर ग्राम नगर
श्रोता त्रिबिध समाज पुर ग्राम नगर
दोहा ३९ · बालकाण्ड
दोहा पाठ
श्रोता त्रिबिध समाज पुर ग्राम नगर दुहुँ कूल। संतसभा अनुपम अवध सकल सुमंगल मूल॥ ३९ ॥
अर्थ
तीनों प्रकार के श्रोताओं का समाज ही इस नदी के दोनों किनारों पर बसे हुए पुरवे, गाँव और नगर हैं; और संतों की सभा ही सब सुन्दर मंगलों की जड़ अनुपम अवध है।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का दोहा ३९ है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।
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मानस का रूप और माहात्म्य