रामभगति सुरसरितहि जाई
रामभगति सुरसरितहि जाई
चौपाई १, दोहा ४० के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
रामभगति सुरसरितहि जाई। मिली सुकीरति सरजु सुहाई॥ सानुज राम समर जसु पावन। मिलेउ महानदु सोन सुहावन॥ १ ॥
अर्थ
सुन्दर कीर्तिरूपी सुहावनी सरयूजी रामभक्तिरूपी गंगाजी में जा मिलीं। छोटे भाई लक्ष्मण सहित श्रीरामजी के युद्ध का पवित्र यशरूपी सुहावना महानद सोन उसमें आ मिला।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई १, दोहा ४० के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।
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मानस का रूप और माहात्म्य