नदी पुनीत सुमानस नंदिनि

चौपाई ७, दोहा ३९ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

नदी पुनीत सुमानस नंदिनि। कलिमल तृन तरु मूल निकंदिनि॥ ७ ॥

अर्थ

यह सुन्दर मानस-सरोवर की कन्या सरयू नदी बड़ी पवित्र है और कलियुग के [छोटे-बड़े] पापरूपी तिनकों और वृक्षों को जड़ से उखाड़ फेंकने वाली है।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “मानस का रूप और माहात्म्य” प्रकरण का चौपाई ७, दोहा ३९ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में मानस सरोवर के रूपक में उसके अंगों, रसों और आध्यात्मिक माहात्म्य का वर्णन है।

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मानस का रूप और माहात्म्य