सेष सहस्रसीस जग कारन
सेष सहस्रसीस जग कारन
चौपाई ४, दोहा १७ के अंतर्गत · बालकाण्ड
चौपाई पाठ
सेष सहस्रसीस जग कारन। जो अवतरेउ भूमि भय टारन॥ सदा सो सानुकूल रह मो पर। कृपासिंधु सौमित्रि गुनाकर॥ ४ ॥
अर्थ
जो हजार सिरवाले और जगत् के कारण (हजार सिरों पर जगत् को धारण कर रखनेवाले) शेषजी हैं, जिन्होंने पृथ्वी का भय दूर करने के लिये अवतार लिया, वे गुणों की खानि कृपासिंधु सौमित्रि मुझ पर सदा सानुकूल रहें।
संदर्भ
यह बालकाण्ड के “सीताराम और परिकर वन्दना” प्रकरण का चौपाई ४, दोहा १७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीताराम, अयोध्यापुरी, सरयू, दशरथ, कौसल्या, लक्ष्मण और भक्त मुनियों की श्रद्धापूर्ण वन्दना का वर्णन है।
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सीताराम और परिकर वन्दना