बंदउँ लछिमन पद जलजाता

चौपाई ३, दोहा १७ के अंतर्गत · बालकाण्ड

चौपाई पाठ

बंदउँ लछिमन पद जलजाता। सीतल सुभग भगत सुख दाता॥ रघुपति कीरति बिमल पताका। दंड समान भयउ जस जाका॥ ३ ॥

अर्थ

मैं श्रीलक्ष्मणजी के चरणकमलों को प्रणाम करता हूँ, जो शीतल, सुन्दर और भक्तों को सुख देनेवाले हैं। श्रीरघुनाथजी की कीर्तिरूपी विमल पताका में जिनका यश दण्ड के समान हुआ।

संदर्भ

यह बालकाण्ड के “सीताराम और परिकर वन्दना” प्रकरण का चौपाई ३, दोहा १७ के अंतर्गत है। इस प्रकरण में श्रीसीताराम, अयोध्यापुरी, सरयू, दशरथ, कौसल्या, लक्ष्मण और भक्त मुनियों की श्रद्धापूर्ण वन्दना का वर्णन है।

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सीताराम और परिकर वन्दना